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Anviti: Sahitya Ke Parisar Mein Kunwar Narain - Khand: 2

Anviti: Sahitya Ke Parisar Mein Kunwar Narain - Khand: 2

Hardcover

General Fiction

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ISBN10: 9388183495
ISBN13: 9789388183499
Publisher: Rajkamal Prakashan
Published: Nov 1 2018
Pages: 520
Weight: 2.05
Height: 1.31 Width: 6.00 Depth: 9.00
Language: Hindi
कुँवर नारायण हमारे समय के बड़े कवि हैं। यदि विश्व के कुछ चुनिन्दा कवियों की तालिका बनाई जाए तो उसमें निस्सन्देह उनका स्थान होगा। वे आधुनिक बोध और संवेदना के उन कवियों में हैं जिन्होंने सदैव कविता को मनुष्यता के आभरण के रूप में लिया है। कुँवर नारायण का काव्य मानवीय गुणों का ही नहीं, मानवीय संस्कारों का काव्य है। कविता में उनका प्रवेश चक्रव्यूह से हुआ। अपने गठन में कलात्मक किन्तु दार्शनिक प्रतीतियों वाले इस संग्रह में जीवन की पेचीदगियों को कवि ने सलीके से उठाया है। आत्मजयी की लगभग अधसदी के बाद वाजश्रवा के बहाने की रचना बतौर कुँवर नारायण यह भी जताने के लिए है कि यदि आत्मजयी में मृत्यु की ओर से जीवन को देखा गया है तो वाजश्रवा के बहाने में जीवन की ओर से मृत्यु को देखने की एक कोशिश है। उनके इस कथन को हम इस रोशनी में देख सकते हैं कि सारा कुछ हमारे देखने के तरीके पर निर्भर है-कुछ ऐसे कि यह जीवन विवेक भी एक श्लोक की तरह सुगठित और अकाट्य हो। उनके रचना-संसार पर समय-समय पर लिखा जाता रहा है। अनेक शोधार्थियों ने उनके व्यक्तित्व और साहित्य पर कार्य किया है। कहना न होगा कि कुँवर नारायण का कृतित्व बहुवस्तुस्पर्शी है। वर्ष 2002 से पहले तक उनके &#

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