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Hum Hushmat: Vol. 3

Hum Hushmat: Vol. 3

Hardcover

General Fiction

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ISBN10: 8126723602
ISBN13: 9788126723607
Publisher: Rajkamal Prakashan
Published: Jan 1 2012
Pages: 186
Weight: 0.85
Height: 0.56 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
'हम हशमत' हमारे समकालीन जीवन-फलक पर एक लंबे आख्यान का प्रतिबिंब है। इसमें हर चित्र घटना है और हर चेहरा कथानायक। 'हशमत' की जीवंतता और भाषायी चित्रात्मकता उन्हें कालजयी मुखडे़ के स्थापत्य में स्थित कर देती है। प्रस्तुत है 'हम हशमत' का तीसरा खंड। समकालीनों के संस्मरणों के बहाने, इस शती पर फैला हिंदी साहित्य समाज, यहाँ अपने वैचारिक और रचनात्मक विमर्श के साथ उजागर है। हिंदी के सुधी पाठकों और आलोचकों ने 'हम हशमत' को संस्मरण विधा में मील का पत्थर माना था; 'हम हशमत' की विशेषता है तटस्थता। कृष्णा सोबती के भीतर पुख्तगी से जमे 'हशमत' की सोच और उसके तेवर विलक्षण रूप से एक साथ दिलचस्प और गंभीर हैं। नज़रिया ऐसा कि एक समय को साथ-साथ जीने के रिश्ते को निकटता से देखे और परिचय की दूरी को पाठ की बुनत और बनावट में जज़्ब कर ले। 'हशमत' की औपचारिक निगाह में दोस्तों के लिए आदर है, जिज्ञासा है, जासूसी नहीं। यही निष्पक्षता नए-पुराने परिचय को घनत्व और लचक देती है और पाठ में साहित्यिक निकटता की दूरी को भी बरकरार रखती है। अपनी ही आत्मविश्वासी आक्रामकता की रौ और अभ्यास में पुरुष-सत्ता द्वारा बनाए असहिष्णु साहित्य-समाज में एक पुरुष का अनुशासनीय बाना धरकर कृष्णा ज

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