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Jeevani Dr. Bhimrao Ambedkar

Jeevani Dr. Bhimrao Ambedkar

Paperback

General Fiction

ISBN10: 9390605806
ISBN13: 9789390605804
Publisher: Prabhakar Prakashan Private Limited
Published: Dec 4 2022
Pages: 178
Weight: 0.51
Height: 0.41 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
अरे तुम कितनी दुर्दशा में हो। तुम्हारे असहाय चेहरे देखकर और तुम्हारे दीनता भरे शब्द सुनकर मेरा हृदय रोता है। तुम अपने ऐसे दीन-हीन जीवन से दुनिया के दुःख-दर्द क्यूं बढ़ाते हो? तुम अपनी माँ के गर्भ में ही क्यूं न मर गए? अब भी मर जाओ तो तुम संसार पर बड़ा उपकार करोगे। यदि तुम्हें जीवित रहना है, तो जिन्दादिल बनकर जियो। इस देश के अन्य नागरिकों को मिलता है, वैसा अन्न, वस्त्र और मकान तुम्हें भी हासिल हो। यह तुम्हारा जन्म-सिद्ध अधिकार है और इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए तुम्हें ही आगे आना होगा। बड़ी मेहनत तथा दृढ़ता के साथ संघर्ष करना होगा।

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