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Kahan Ho Gayi Bhool

Kahan Ho Gayi Bhool

Paperback

Poetry

ISBN10: 8196148887
ISBN13: 9788196148881
Publisher: Tingle Books
Published: Mar 27 2024
Pages: 124
Weight: 0.37
Height: 0.29 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
माँ अपने नवजात से संवाद शुरू करती है और यह जीवन भर चलता रहता है। वह यह नहीं सोचती कि यह संवाद कितना सफल होता है। वह लगातार अपना सुख दुःख, उत्साह हताशा, वातावरणस्थिति, आशा आकांक्षा बताती रहती है। बच्चा सुनता खेलता बढ़ता रहता है और स्थिति को समाज को विकास को समझताआत्मसात करता रहता है। यह विकसित बेहतर समाज की रचना का आधार बनता है। एक अच्छी दुनिया सजाता निर्माण करता है। यह भविष्य की संभावनाओं का विस्तार है। एक माँ के संवाद की तरह मैं यह संग्रह आप तक पहुंचाना चाहती हूं। पढ़िए, गुणीये, सुधार करिये।

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