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Gyan Yoga

Gyan Yoga

Paperback

General Fiction

ISBN10: 9390605350
ISBN13: 9789390605354
Publisher: Lightning Source Inc
Published: Aug 25 2023
Pages: 186
Weight: 0.53
Height: 0.43 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
इस पंचेन्द्रियग्राह्य जगत् में मनुष्य इतना अधिक आसक्त है कि वह उसे सहज में ही छोड़ना नहीं चाहता। किन्तु वह इस बाह्य जगत् को चाहे जितना ही सत्य या साररूप क्यों न समझे, प्रत्येक व्यक्ति और जाति के जीवन में एक समय ऐसा अवश्य आता है कि जब उसे इच्छा न रहते हुए भी प्रश्न करना पड़ता है- 'क्या यह जगत् सत्य है?' जिन व्यक्तियों को अपनी इन्द्रियों की विश्वसनीयता में शंका करने का तनिक भी समय नहीं मिलता, जिनके जीवन का प्रत्येक क्षण किसी-न-किसी प्रकार के विषय भोग में ही बीतता है, मृत्यु एक दिन उनके भी सिरहाने आकर खड़ी हो जाती है और विवश होकर उन्हें भी कहना पड़ता है- 'क्या यह जगत् सत्य है ?' इसी एक प्रश्न से धर्म का आरम्भ होता है और इसके उत्तर में ही धर्म की इति है । इतना ही क्यों, सुदूर अतीत काल में, जहाँ इतिहास की कोई पहुँच नहीं, उस रहस्यमय पौराणिक युग में, सभ्यता के उस अस्फुट उषाकाल में भी हम देखते हैं कि यही एक प्रश्न उस समय भी पूछा गया है- 'इसका क्या होता? क्या यह सत्य है?'

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