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Ashtavakra Mahageeta Bhag VI: Na Sansar Na Mukti (अष्टावक्र महागी&

Ashtavakra Mahageeta Bhag VI: Na Sansar Na Mukti (अष्टावक्र महागी&

Paperback

Philosophy

ISBN10: 8189605828
ISBN13: 9788189605827
Publisher: Diamond Books Ltd
Published: Jan 13 2022
Pages: 330
Weight: 0.92
Height: 0.74 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
जब तक सहारा है तब तक मन रहेगा। सहारा मन को ही चाहिए। आत्मा को किसी सहारे की जरूरत नहीं है। मन लंगड़ा है; इसको बैसाखियां चाहिए। तुम बैसाखी किस रंग की चुनते हो इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। मन को कुछ उपद्रव चाहिए, व्यस्तता चाहिए, आक्युपेशन चाहिए। किसी बात में उलझा रहे। माला ही फेरता रहे तो भी चलेगा। रुपयों की गिनती करता रहे तो भी चलेगा। काम से घिरा रहे तो भी चलेगा। रामनाथ की चदरिया ओढ़ ले, राम-राम बैठकर गुनगुनाता रहे तो भी चलेगा। लेकिन कुछ काम चाहिए। कुछ कृत्य चाहिए। कोई भी कृत्य दे दो, हर कृत्य की नाव पर मन यात्रा करेगा और संसार में प्रवेश कर जाएगा।

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