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Diya Jale Saari Raat: Bin Baati Bin Tail (दीया जले सारी रात &#2348

Diya Jale Saari Raat: Bin Baati Bin Tail (दीया जले सारी रात ब

Paperback

Philosophy

ISBN10: 935684786X
ISBN13: 9789356847866
Publisher: Diamond Pocket Books Pvt Ltd
Published: Aug 30 2024
Pages: 458
Weight: 1.27
Height: 1.02 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
तुम अगर अंधेरे होते तो तुम्हारी मुक्ति का कोई उपाय नहीं था। अंधेरे की कोई मुक्ति नहीं हो सकती। क्यों? अंधेरा है ही नहीं। तुम्हारी मुक्ति हो सकती है, क्योंकि तुम अंधेरा नहीं हो। बिन बाती बिन तेल तुम जल रहे हो। तुम्हारे भीतर एक दीया है, जो सदा से जल रहा है। सदा जलता रहेगा। कितना ही ढंक जाए, जैसे बादल आ जाते हैं, आकाश में सूरज ढंक जाता है। इससे कोई सूरज मिटता नहीं। जरा बादलों की परतों को हटाओ, सूरज फिर प्रकट हो जाता है। थोड़ी सी हवाएं चाहिए बुद्धपुरुषों की, कि तुम्हारे बादल छितर-बितर हो जाएं और तुम्हें स्मरण आ जाए कि तुम कौन हो ! आत्मबोध--कोई आत्मा को पैदा करना नहीं है, सिर्फ भूली आत्मा की पुनः स्मृति है, सुरति है।

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